सुनीता विलियम्स, भारतीय मूल की नासा की अंतरिक्ष यात्री, अंतरिक्ष में अपने मिशन के बाद पृथ्वी पर वापस लौट रही हैं। उनकी वापसी 19 मार्च को तड़के 3:27 बजे स्पेसएक्स के स्पेसक्राफ्ट ड्रैगन के जरिए होगी। यह स्पेसक्राफ्ट फ्लोरिडा तट पर समुद्र में उतरेगा। नासा इस पूरी यात्रा का सीधा प्रसारण करेगा।
सुनीता विलियम्स और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री 18 मार्च को सुबह करीब 8:30 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से रवाना होंगे। उनकी यात्रा करीब 17 घंटे की होगी। सुनीता विलियम्स को मूल रूप से 8-10 दिन के लिए अंतरिक्ष में जाना था, लेकिन स्पेसक्राफ्ट में खराबी के कारण उन्हें 254 दिन तक अंतरिक्ष में रुकना पड़ा। इसके साथ ही वह अंतरिक्ष में लगातार सबसे लंबे समय तक रहने वाली पहली महिला बन गई हैं।
अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की चुनौतियाँ
अंतरिक्ष स्टेशन धरती से करीब 403 किलोमीटर ऊपर स्थित है और यह 28,163 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाता है। इस वजह से यहाँ 24 घंटे में 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त होता है। यहाँ एक दिन सिर्फ 90 मिनट का होता है। अंतरिक्ष स्टेशन पर रहना बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यहाँ संसाधन सीमित हैं। खाना पैक्ड होता है और उसे गर्म करके खाया जाता है। पानी रीसाइक्लिंग से मिलता है, जिसमें मूत्र और पसीने को भी शुद्ध किया जाता है। ऑक्सीजन जनरेटर के जरिए पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित कर ऑक्सीजन पैदा की जाती है।
वापसी की प्रक्रिया
स्पेसक्राफ्ट ड्रैगन की वापसी की प्रक्रिया 6 चरणों में पूरी होती है:
1. तैयारी: अंतरिक्ष यात्री अपने सभी उपकरण और डाटा को सुरक्षित रखते हैं और स्पेसक्राफ्ट में सवार होते हैं।
2. अलगाव स्पेसक्राफ्ट ISS से अलग होता है और इंजन को चलाकर पृथ्वी की ओर बढ़ता है।
3. वायुमंडल में प्रवेश स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, जहाँ घर्षण से भारी गर्मी पैदा होती है।
4. हीट शील्ड स्पेसक्राफ्ट में लगी हीट शील्ड इसे गर्मी से बचाती है।
5. पैराशूट सुरक्षित लैंडिंग के लिए पैराशूट का समय पर खुलना जरूरी है, जिससे स्पेसक्राफ्ट की गति कम होती है।
6. लैंडिंग स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी पर सुरक्षित रूप से उतरता है, आमतौर पर समुद्र या रेगिस्तान में।
सुनीता विलियम्स का संदेश
सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष स्टेशन से दिवाली का त्योहार मनाया और पूरी दुनिया को संदेश दिया कि दिवाली का त्योहार आशाओं को जीवित रखता है। उनकी यह यात्रा न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानवीय संकल्प और साहस की भी एक मिसाल है।
सुनीता विलियम्स की वापसी पूरी दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक घटना है, और यह अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है।
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